"भैया मुझे कुछ कहना है" दैनिक भास्कर मधुरिमा २४/०८/२०१६
मेरे प्यारे भैया, तुम सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु हो यही मेरी कामना है. मैं क्या हर बहन अपने भाई के लिए सदैव मंगल कामना ही करती है. भैया बदलें में मैंने सिर्फ तुमसे एक वचन ही चाहा है कि तुम सदैव मेरी रक्षा करोगे. हाँ तुमसे मेरा रक्त सम्बन्ध है, हम एक माँ की संतान हैं. तुम मेरी रक्षा को सदैव तत्पर रहते भी हो. इसके लिए मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती भी हूँ. पर भैया जब मैं सड़क पर कहीं जा रहीं होती हूँ, कॉलेज से लौट रहीं होती हूँ या देर रात दफ्त्तर से निकलती हूँ तो तुम वहां हमेशा तो नहीं होते हो. वहां मुझे मिलतें हैं वो नर पिशाच जो इन्सान की खाल ओढ़े अबला स्त्रियों की अस्मिता को तार तार करने को बेताब दिखतें हैं. वह भी तो किसी के भाई होते होंगे पर दूसरों की बहनों पर कुदृष्टि डालने का कुकृत्य वे बेख़ौफ़ कर गुजरतें हैं. भैया तुम अपनी बहन को सकुशल घर लौट आने पर सुकून की सांस ले निश्चिन्त हो जाते होगे. कई बातें रोज घटतीं हैं जिन्हें मैं हर दिन चुपचाप सह लेतीं हूँ ताकि बात का बतंगड़ ना बनें. तुम परेशां ना हो जाओ....

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